Guntur का ‘वाटर वॉर’: क्या वायरल वीडियो ही अब न्याय का नया रास्ता है?

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By #JournalistVijay

Guntur से एक बहुत ही परेशान करने वाली खबर सामने आई है। एक मामूली-से पानी के विवाद ने इतना खौफनाक रूप ले लिया कि एक महिला को सरेआम पीटा गया। यह घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है, लेकिन इस पूरी कहानी में एक ट्विस्ट भी है—और वह है सिस्टम की स्पीड।

घटना के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने खुद मामले का संज्ञान लिया और एक्शन के आदेश दिए। नतीजा यह हुआ कि संबंधित अधिकारी को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया। यह घटना इस बात की मिसाल है कि जब ऊपर से डंडा चलता है, तो सिस्टम कितनी तेजी से हरकत में आता है।

जब ‘पब्लिक’ बनी ‘पुलिस’

मैं एक जर्नलिस्ट के तौर पर हमेशा से यह मानता आया हूँ कि आज के दौर में असली ताकत वायरल मीडिया (Social Media) के हाथ में है। Guntur की यह घटना इसका एक क्लासिक उदाहरण है।

अगर यह वीडियो वायरल नहीं होता, तो शायद यह मामला भी किसी थाने की धूल फांक रही फाइलों में दफन हो जाता। हो सकता है कि लोकल पुलिस कोई एफआईआर दर्ज कर लेती, लेकिन वह ‘swift action’ (तुरंत कार्रवाई) जो हमने देखी, वह कभी नहीं होती।

वायरल वीडियो ने bureaucratical processes (नौकरशाही की प्रक्रियाओं) को दरकिनार कर दिया। इसने अधिकारियों को मजबूर किया कि वे सोफे से उठें और काम करें। एक तरह से, जनता का गुस्सा और सोशल मीडिया का शोर मिलकर ‘कैटालिस्ट’ बन गए, जिसने न्याय की प्रक्रिया को सुपर-स्पीड दे दी।

बॉटम लाइन यह है: यह अच्छी बात है कि Guntur में पीड़ित महिला को न्याय मिलता दिख रहा है और दोषी अधिकारी पर गाज गिरी है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या सिस्टम इतना लाचार है कि उसे जगाने के लिए पहले एक वीडियो वायरल होना पड़ता है?

जब ‘वायरल मीडिया’ ही न्याय का एकमात्र पावरफुल कैटालिस्ट बन जाता है, तो यह सवाल उठता है कि हमारी सामान्य प्रशासनिक मशीनरी आखिर कब तक ‘ stalling’ (अटकी) रहेगी?

क्या आपको लगता है कि सोशल मीडिया के बिना Guntur जैसी घटनाओं में इतनी जल्दी न्याय मिलना संभव था? हमें कमेंट्स में अपनी राय बताएं!

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