Opinion

Written by: Journalist Vijay Mishraकल ही की बात है, दुनिया के इस कोने से उस कोने तक भू-राजनीति (Geopolitics) के बड़े-बड़े फव्वारे छूट रहे थे। हर कोई यह साबित करने में जुटा था कि वह इतिहास...
— विजय मिश्राहमारे देश में जब भी कोई नया ईंट-गारे का ढांचा खड़ा होता है, तो उसका सबसे पहला काम जनता की सेवा करना नहीं, बल्कि नेताओं की वरिष्ठता और उनकी अहं-तुष्टि का माप-तौल करना होता...

चाय, पत्नी, वो और सुहागरात का अंत | By Journalist Vijay Mishra

सबसे पहले यह बताता हूँ कि यह लेख लिखनें की नौबत क्यों आई?आज सुबह जब मैं अखबार और समाचार पोर्टल्स की सुर्खियों से गुज़र...

चमत्कार का बाज़ार और दिमाग़ की नीलामी by Journalist Vijay Mishra

आजकल प्रेमानंद जी सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। उनकी कई रील्स देखकर अचानक गौतम ऋषि की याद आ गई—उस दौर की याद, जब...

चाणक्य, दफ़्तर और दीमक: Journalist Vijay की शैली में कॉरपोरेट चाणक्य-नीति

Writer: Journalist Vijay Mishraजब इस देश में किसी को अपनी धूर्तता पर 'रणनीति' का आवरण चढ़ाना होता है, तो वह सीधे चाणक्य की शरण...

ऋषियों की ऑडिट रिपोर्ट और वैकुंठ का लोकतंत्र: तिरुपति बालाजी का इतिहास | Journalist Vijay

Written by: Journalist Vijay Mishraहमारे यहाँ धर्म और देवताओं के मामले में एक बड़ी सुविधा है—ईश्वर कभी बुरा नहीं मानता। अगर मानता, तो वैकुंठ...

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